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एनएचएम कर्मचारी कों की हड़ताल आज 26 वें दिन भी जारी

New Delhi, Fri, 13 Oct 2017 NI Wire

नई दिल्लीए 13 अक्टूबर: एनएचएम व इसके छाते तले चल रहे लगभग 11 कार्यक्रमों के लगभग 3000 कांट्रेक्ट कर्मचारी गत् 18 सितंबर 2017 समान कार्य के लिए समान कार्य की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे हैं। इनमें 300 डाक्टरए 182 स्टाफ नर्सए 715 एग्जिलरी नर्स एंड मिडवाईफ ;एएनएमद्धए 25 पब्लिक हैल्थ नर्स ;पीएचएनद्धए 102 फार्मासिस्टए 342 लैब तकनिशियनए 187 ट्यूबरक्लोसिस हैल्थ विजिटरए 21 ऑररेशन थिएटर असिस्टेंटए ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियनए एन्सथेसिस्टए अकाउंट मैनेजरए सुपरवाईजरए 252 डाटा एंट्री आपरेटरए क्लर्कए ड्रेसर ड्राईवर आदि कुल मिलाकर लगभग 80 पदों के कर्मचारी शामिल हैं जो कि दिल्ली के सभी अस्पतालोंए डिस्पेंसरीयोंए पॉली क्लिनिक्सए सीड पीयूएचसी ;सीड प्राईमरी अर्बन हैल्थ सेंटरद्धए स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत हैं। इनमें से बहुत से कर्मचारी लगभग दो दशकों से दिल्ली की जनता को अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं वर्षों से अपने अधिकारों को पाने के संघर्ष करते आ रहे हैं किंतु सरकार अनैतिक तरीके से इनका शोषण कर रही है व इन्हें इनके मूलभूत अधिकारए समानता के अधिकार तक से वंचित रखा हुआए इन्हे इनके समकक्षों का एक.तिहाईए एक.चौथाई तक वेतन दिया जा रहा है व इन्हें स्वास्थ्य बीमाए जीवन बीमाए प्रोविडेंट फंड़ आदि मूलभूत सुविधाएं तक प्रदान नहीं की गई हैं। ना जाने कितने गंभीर दुर्घटनाओं के शिकार हुएए कितनों को गंभीर बीमारियां हुई व कितनों ने अपनी जानें गवांई किंतु सरकार की तरफ से किसी को भी एक रुपए तक की सहायता प्रदान नहीं की गई। अभी हाल ही में पिछले एक वर्ष के दौरान 6.7 कर्मचारी गंभीर दुर्घटनाओं के शिकार हुए जिनमें से एक अभी भी गंभीर हालत में अस्पताल मे भर्ती है व उसके इलाज का कुल खर्च साढ़े आठ लाख रूपये बताया गया हैए एक कर्मचारी घर पर पड़ा हुआ है जिसको अपनी टूटी टांग का इलाज कराने में लगभग साढ़े तीन लाख रूपये अपनी जेब से खर्च करने पड़ेए छुट्टियों की तरख्वाह का नुकसान अलग से।


हड़ताल से दिल्ली में स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैए कुछ स्थानों पर ठप ही पड़ गई हैए 90 प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर हैए बहुत सी डिस्पेंसरीज मे ओपीडी नही लग रही है और जहां लग रही है वहां लोड बहुत ज्यादा हैए जिसके चलते सरकार को ओपीडी का टाईम बढ़ाना पड़ गया है किंतु मरीजों को फिर भी खाली लौटना पड़ रहा हैंए बच्चों के टीके नहीं लग रहे हैंए लैबोरेट्रीज में जांचें नही हो रही हैंए आपरेशन स्थगित किए जा रहें हैए मेटरनिटी होम में क्राईसिस हैए फीवर क्लिनिक को भी पोस्टपोन्ड कर दिया गया है इसके अलावा आउटरीच सेवाएंए कुष्ठ रोगियों व आशा वर्कर आदि का काम भी प्रभावित हो रहा है। दिल्ली में लगभग एक लाख मरीज टीण् बीण् का इलाज ले रहें हैं जिनका इलाज इस हड़ताल से बुरी तरह से प्रभावित हुआ हैए टीण् बीण् की दवाईयां स्वास्थयकर्ता की देखरेख में सामने बिठाकर खिलाई जाती हैं व एक दिन की भी दवाई छूटने पर टीण् बीण् के बिगड़ जाने व लाईलाज प्रकार की टीण् बीण् एमडीआरध्एक्सडीआर टीण् बीण् मे परिवर्तित हो जाने का खतरा बना रहता है। लगभग एक माह से इन मरीजों को ढंग से दवाईयां नही मिल रही हैंए इन्हें दवाईयों के लिए दर.दर भटकना पड़ रहा हैए तीन.तीन सप्ताई की दवाई बिना देखे यूं ही बांटी जा रही हैए अनट्रेंड स्टाफ से दवाईयां बंटवाई जा रही हैए बलगम जांचे नही हो पा रही हैं। टीण् बीण् एक अत्यंत संक्रामक रोग है जो कि हवा से फैलता है व एक टीण् बीण् का मरीज एक वर्ष में लगभग 15 नए मरीज तैयार कर सकता हैए हो सकता है कि 50.60ए000 नए लोग इस संक्रमण के शिकार हो चुके हों। विभाग चाहे जो भी दर्शाने की कोशिश कर रहा हो किंतु वास्तविकता यही है कि स्थिति बहुत बिगड़ चुकी है और दिल्ली की जनता बहुत परेशान है।

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी सरकार ने चुनाव से पूर्व अपने घोषणापत्र में सभी संविदाकर्मियों को नियमित करने का वायदा किया था। इम कर्मचारियों की मांग है कि जब तक नियमितिकरण की प्रक्रिया चलती है हमें अंतरिम राहत के रूप मे हमें समान कार्य समान वेतन का लाभ प्रदान किया जाएए स्वयं मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी ने 27 अक्टूबर 2016 को दिल्ली के सभी संविदा कर्मचारियों को समान कार्य समान वेतन लाभ देने की घोषणा की थी और जब एनएचएम कर्मचारी 9 जनवरी 2017 को हड़ताल पर बैठे तो स्वास्थ्य मंत्री जी ने स्वयं इन कर्मचारियों के बीच आकर घोषणा की कि 31 मार्च 2017 से पहले.पहले इन कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन प्रदान कर दिया जाएगाए यदि ऐसा ना हो तो आप 1 अप्रैल से दोबारा आकर हड़ताल पर बैठ जानाए किंतु इस घोषणा पर अमल नहीं किया गया। फिर भी मरीजों व दिल्ली की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए ये कर्मचारियो अतिवादी कदम उठाने से बचते रहे लेकिन जब पानी सर से गुजर गया तो मजबूर होकर 18 सितंबर 2017 से ये कर्मचारी पुनः हड़ताल पर चले गए।

दिल्ली स्टेट एनएचएमध्आरसीएचध्आरएनटीसीपीध्आईडीएसपीध्एनएलईपीयध्एनपीसीबी ;ऑल वर्टिकल प्रोग्रामद्ध एक्शन कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि जब से हम हड़ताल पर बैठे हैं हमारे बीच पांच दौर की वार्ता हो चुकी है किंतु कोई परिणाम नही निकलाए विभाग का मानना है कि हमारे द्वारा समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग किया जाना नाजायज हैए अनुचित हैए हम समझ ही नही पा रहे हैं कि क्या हम सचमुच एक आजाद लोकतांत्रिक मुल्क में रह रहे हैंए क्या भारत देश मे समानता की मांग करना नाजायज है। खैर हड़ताल शुरू होने के छठे दिन 24 सितंबर 2017 को स्वास्थय मंत्री श्री सत्येंन्द्र जैन जी ने बुलाया था और हमें जानकारी दी की हमने आपकी समान कार्य के लिए समान वेतन की फाईल बनाकर माननीय उपराज्यपाल महोदय के पास भेज दी हैए वह फाईल 19 दिनों तक उपराज्यपाल सचिवालय में पड़ी रही और हम लगातार इस फाईल के संदर्भ में जानकारी प्राप्त करने हेतु व माननीज उपराज्यपाल महोदय से मुलाकात हेतु उपराज्यपाल सचिवालय में अनुरोध करते रहे किंतु ना तो हमें फाईल के संदर्भ मे कोई जानकारी प्रदान की गई और ना ही मा० उपराज्यपाल महोदय के साथ मुलाकात कराई गई। दूसरी तरफ फाईल भेजकर मा० स्वास्थ्य मंत्री जी ने भी इतिश्री कर लीए मा० मुख्यमंत्री महोदय जी ने भी हमारी ओर से आंखें मूंद रखी हैं। कोई भी चाहे वह अधिकारी होंए नेतागण हों अथवा माननीय उपराज्यपाल महोदय हों ना तो हम रोड़ पर पड़े 3000 सवास्थ्य कर्मचारियों के लिए फिक्रमंद है और ना ही दिल्ली की किसी को फिक्र है। किंतु हम भी इस बार ठानकर बैठें हैं कि चाहे कुछ भी हो जाएए हम लोग अपना हक लेकर रहेंगे।


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